भावनाओं के दरिया में .....
कहाँ हुआ गुम तू सजना की अब बस मेरी ही आवाज है गूँजे दिल में हुआ सूनापन इतना बेताब सी नजरें राहों पे टीकी की जैसे तलाशती हो गुजरा हुआ कल अपना बेबस से लब ये मेरे सिये हुए जैसे भावनाओं के दरिया में तलाशते हों शब्द अपना तुम्हें शायद इस बात का अहसास नहीं जाते जाते ले गए संग तुम जीवन मेरा बुत बन कर खड़े रह गए हम यूँ ही की अब तो न रहा अहसास अपनी ही धड़कन का

सावन की बूँदें आ गयीं सूखी बिन तेरे मेरे पास वे
ReplyDeleteन मैं भीगूँ न मैं जूलूँ तेरे आने की आस में
वाह .... क्या बात है
लाजवाब !
ये वर्ड वेरिफिकेशन अगर ना हो ... तो क्या हो ??
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