साथ बीता दो लम्हों का सफ़र.....



साँसे उलझी उलझी सी अंखियों मैं नमी नमी सी

जाने कौन अजब सी बात की हम अब तक उन्हें भूले नहीं
कभी हंसूं नाम आँखों से तो कभी गम में भी मुस्काऊँ
किस राह चल के जाऊं की तेरे कदमों के निशां पा जाऊं

जिंदगी के रास्ते अनजाने कभी एक पल को दिल सहमे ऐसे
जैसे मेरे जीवन से साँसों की डोर रूठ गयी
साथ बीता दो लम्हों का सफ़र और कुछ इस तरह की
हम तेरे हर पल के एह्सास के हमसफ़र बन कर रह गये 



इस सफ़र में तेरी खुशबु बिखर रही थी मेरे जहन में हौले से
की अचानक एक दिन जिंदगी जुदा राहों पे बिन बताये मुड गयी
न देख पाए और न कह सके हम तुमसे अलविदा एक बार
पीर इतना की बस दिल चीर अँखियाँ से नीर धरा बह गयी
 
चाहा जुबान ने कुछ कहना पर ये धारा लफ़्ज़ों को बहा ले गयी
अब सुबह से शाम तलक तेरे क़दमों के निशान खोजा करते हैं
रातों को सितारों से तुझ तक पहूचाने की मिन्नतें किया करते हैं
सदियों तलक बस एक आस में यूँ ही बीत रहे हैं सारे लम्हे  
की कभी तो गुजरेगा तू उन्ही जुदा राहों फिर से एक बार 


मेरा दिल जो अब तक धड़कता है तेरे सीने में बन एक अहसास

इश्क तो वो खुदाई है जो कभी मिटाए नहीं मिटती
ढहता है दुनियां के उसूलों और दस्तूरों का महल
जब जब इश्क को मिलता है एक इंसानी नाम

1 comments:

AbBy said...

no words ... anything i say will be undervalued i know .. my personal best line were की अचानक एक दिन जिंदगी जुदा राहों पे बिन बताये मुड गयी
न देख पाए और न कह सके हम तुमसे अलविदा एक बार... awesome /// the whole theme was kewl

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