Posts

Image
क्या इंसाफ है तेरा भी ऐ खुदा  अपने गुनाहों का जुर्माना पूछा था  देना था तो बैराग ही दे देता  क्यों बेवजह इश्क़ की राह थमा दी ?

डोर मेरी तेरे हाँथ

डोर मेरी तेरे हाँथ में जो है तु भी तो बंध गया मुझसे  छूट न पायेगी तुझसे ये डोर  कैसे करेगा खुद को दूर मुझसे  नाचती हूँ मैं तेरी थिरकन पे  मीरा तो नहीं पर मैं हूँ हीर तेरी  इश्क़ के रोग ने किया बावला  इसमें तेरा कोई कसूर नहीं  आग का मतलब जानकर अंगारो पे चलना मजबूरी मेरी 

तेरे कदम थमे क्यों ?

चल चलें कहीं दूर, जहाँ बस तू और मैं थमे  क़दमों को रोक न ,मेरे पास आने दे जिन दीवारों में दरारें हैं  उन दीवारों को तोड़ दें जिन बेड़ियों से जकड़े हैं उन बेड़ियों को तोड़ दें अब देर कैसी ,क्यों किसलिए सोचना इतना तेरे दिल में जो आशियाना ,चल वहीँ जा बसें जीना है तुझे मेरे साथ ,मरना है मुझे तेरे साथ काफी नहीं क्या ये , इस प्यार के लिए

शोहरत के परिंदे

Image
हम अक्सर शोहरत की चाह में जिंदगी के छोटे छोटे पलों में छुपी खुशियों को नज़रअंदाज़ कर दिया करते हैं , आगे बढ़ने की चाहत में कुछ ऐसा पीछे छूटता है जिसे हम चाह कर भी वापस नहीं पा सकते । 

प्यार का सैलाब ...

Image

तितलियाँ

Image
मचलती हैं मन में हज़ारों तितलियाँ  वहम ही सही तुमने मुझसे इश्क़ तो किया

खो गया है बचपन

खो गया है कहीं तो बचपन  ढूँढने निकला उसे उन गलियों में  आंकने को ज़मी नहीं मिली  तराशने को आसमाँ न मिला  रौंद रहे थे एक दुसरे के साये भी एक दूसरे को  पैर फसा मैं गिरा, रास्तों पे गढ्ढे तक दिखते नहीं  क्या नन्हे क़दमों को मिलेगा रास्ता चलने को  या हवा में रस्ते बन चुके होंगे कहीं  खो गया है कहीं तो बचपन  बहुत ढूँढने पे उन गलियों में  खो गया है  बचपन   कहीं   ढूँढने निकला उसे उन गलियों में  आंकने को ज़मी नहीं मिली  तराशने को आसमाँ न मिला  रौंद रहे थे हमारे साये भी एक दुसरे को  मैं उलझा गिरा, कोई हाँथ न बढ़ा उठाने को  चलने को एक ठीक ठाक सी गली भी न मिली  क्या नन्हे क़दमों को मिलेगा रास्ता चलने को  सुना है आजकल भीड़ बहुत है आसमान में  लगता है वहीँ गया है घूमने हवा की गलियों में   जला न दे सूरज की आँच उसे  लग न जाए बादलों की ठोकर कहीं  ले न जाए उसे कोई उड़ा कहीं ,  मुझे भी बता दो रास्ता आसमां तक जाने का  खो गया है...